जाएं तो जाएं कहां
ज़िंदगी के छटे दशक के आखिरी पड़ाव को पार करते नींद का सुबह चार और पांच बजे के बीच खुल जाना अब रोज का नियम बन चुका था। घर के और सभी लोग सो रहे थे। लिहाज़ा चुपचाप उठ कर बाहर बाल्कोनी में जा के देखा तो मौसम और हवा दोनो पिछले दिन ज्यादा साफ थे। दिल्ली में नवंबर मास के शुरू में यह एक वरदान जैसा लगा। उम्मीद ही नही विश्वास था धुएं से भरे वातावरण का। कल ही तो हवा का क्वालिटी इंडेक्स 450 था और सरकार ने और अपनी तरफ से और अपनी समझ से कुछ कदम उठाए वातावरण को काबू में रखने के लिए। लेकिन आज तो मौसम विभाग के अनुसार दक्षिण पूर्वी हवा ने कुछ राहत दी । प्रदूषण को एक कैटेगरी तो कम कर ही दिया होगा इसने। सोचा क्यों ना इसका फायदा लिया जाए सुबह की सैर करके। हल्की ठंड में अपनी जैकेट पहन के निकलते ही याद आया कि एक डंडा हाथ में लेना अच्छा होगा। क्या पता कौन सा कुत्ता किस मूड में हो ? जानवर भी तो 450 इंडेक्स की प्रदूषित हवा से परेशान होंगे। फोन पर एक रेडियो का सुबह का ...