क्या आज हिन्दू समाज और हिन्दू धर्म पर खतरा मंडराने लगा है ?

   

         लोक सभा के चुनावों मे भारतीय जनता पार्टी पूर्ण बहुमत नहीं ले पायी पर  अपने गठबंधन के सहयोगियों के साथ मिल कर मोदी जी के नेतृतव मे सरकार बना कर काम शुरू किया।  सब कुछ तो नॉर्मल  है। चुनावों से  पहले कुछ लोगों ने एक बड़े पैमाने पर यह प्रचार किया गया की हिन्दू समाज विशेषतौर पर सनातन धर्म का पालन करने वालों को अपनी  संस्कृति और धर्म और स्वयं को बचाने के का ये मौका है और इसके लिये  बीजेपी और मोदी जी को वोट  दें । 

इस तथ्य को बताने  के लिए ज्यादातर यह प्रचार किया गया की किस तरह इस्लाम को मानने वालों ने इस धरती पर क्रूरता से हमले कर मंदिरों को तोड़ा और हिंदुओं को लूट कर कत्ल किया  या जबरन मुसलमान बनाया । यह कहा गया की अगर अब हिंदुओं ने मोदी जी और बीजेपी को पूर्ण बहुमत नहीं दिया तो कुछ ही वर्षों मे पुराना इतिहास फिर शुरू हो जाएगा और हिंदुओं को घर छोड़ कर कहीं और जाना पड़ेगा। बार बार कहीं कहीं के उदाहरण दिए गये जहां मुसलमानों ने धीरे धीरे किसी एक एरिया को कुछ वर्षों मे पूरी तरह अपने समाज का गढ़ बना के दूसरों को निकलने पर मजबूर किया। 

  बीजेपी का समर्थक होने के बावजूद मै इस वर्णन का समर्थन नहीं कर पाया ।  पहले ही सात दशक से             ज्यादा  पुरानी सरकारों  की तुष्टीकरण की नीति से दोनों समाजों मे दूरी बढ़ती  रही। बीजेपी के आने के बाद           बाइपोलर  रवैये से इस दूरी मे बढ़ोतरी ही हुई । सभी राजनेताओं का मकसद शायद कुर्सी  हासिल करना ही          था  और  अभी भी है ।  

 मेरी जानकारी मे इस वर्णन का प्रचार करने वाले कोई कम पढ़े या कम आमदनी  वाले साधारण आदमी  नहीं बल्कि अच्छे पढे और रहने  वाले बहुत ज्यादा थे । कईं   बार  एक लंबा   वर्णन सुनने या पढ़ने के बाद               कुछ सवाल दिमाग मे आए : 

        1.     मुसलमानों की इस बताई जा रही सोच का  (धीरे धीरे कब्जा करके हिंदुओं को भागने की) निष्कर्ष कैसे                  निकाला  गया ?

        2.     क्या देश मे 1947 के बाद हिंदुओं की संस्कृति और धर्म के प्रति आस्था कम हुई है ? 

        3.     क्या बीजेपी के चुनाव घोषणा पत्र मे हिन्दू धर्म को बचाने के व्यवधान रखें गये ?

        4.     यदि इस वर्णन को ठीक माने  तो  कहने वालों  का क्या प्लान है इस दिशा मे आगे काम करने का  ?

         किसी भी प्रशन का उत्तर नहीं मिला  और ऐसा लगा के ये सिर्फ कहने की बात है वोट प्रचार के लिए । 

इन सारी बातों मे हिन्दू समाज और धर्म को बचाने की बात तो बताई पर उसका मुख्य कारण इस्लाम की             प्रचार और प्रसार की वर्षों पुरानी नीति को बताया । कहीं भी हिन्दू धर्म की समृद्ध विशेषताएं और उनके प्रसार         की नीति और उसके लिए कार्यों को नहीं बताया ।  इन लोगों से हिन्दू धर्म के प्रचार और प्रसार के बारें तो आज तक कुछ भी नहीं सुना । 

चुनाव परिणाम के बाद इन लोगों मे कुछ देर चुप्पी रही । उसके बाद शुरू हुआ सिलसिला हिन्दू समाज को कोसने का । सोशल मीडिया पर दिन मे 3 से 4 ऐसे संदेश आने लगे जिनसे लगा की बीजेपी को पूर्ण बहुमत न आने का कारण हिन्दू समज के कुछ लोगों का धोका देना है। ये लोग आतंकवादीओं से मिल गये और बीजेपी के खिलाफ वोट दी।  ऐसे ही  एक संदेश मे किसी ने कहा -  'अच्छा हुआ कि भगवान राम वानर सेना लेके गये युद्ध लड़ने । मनुष्य तो सोने के लालच मे उनका साथ छोड़ देते'। एक और मैसेज मे एक कविता मिली जिसमे कवि एक कार वाले से कह रहा कि धीरे हॉर्न बजाओ , इस देश का हिन्दू सोया है। अनेक इस तरह के मैसेज मिले।  समझ मे नहीं आया की बीजेपी तथा मोदी जी की लिमिटेड सफलता की वजह से ये लोग जिनका पहले भी वर्णन बेमतलब था , अब अपने ही समाज को लताड़ रहें हैं ।  

कुछ लोगों ने अयोध्या के वोटरों को  विशेष कमेन्ट दिया बीजेपी की वहाँ की हार का। मन मे सवाल उठा की बीजेपी की राजनैतिक हार से राम मंदिर का क्या सम्बद्ध है ? मंदिर तो एक सदियों से चली आ रहे विवाद का हल निकाल के हिन्दू समाज की राम भगवान के प्रति आस्था के लिए बनाया  जा रहा है और अभी बहुत बनना बाकी है। इसे राजनतिक कारणों से जोड़ना जरा भी सही नहीं। क्या सभी कहने वाले इसे भी एक राजनतिक बिन्दु   मान रहे हैं ? 

हिन्दू समाज और धर्म हजारों साल से बनी एक मजबूत व्यवस्था है। कोई भी शक्ति इसे नहीं  तोड़ पायी समाप्त करना तो दूर की नहीं बल्कि कोई बात ही नहीं है। 

सो एक विशेष आग्रह है उन सभी से जो इस किस्म के प्रचार मे दिल जान से लगें है ----- इसे यहीं खतम करें और देश की उन्नति के लिए काम करें 


नवीन कुमार बंसल 

         

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